दिल्ली में नॉन ऑफिशियल स्टाफ पर छाए संकट के बादल

दिल्ली में नॉन ऑफिशियल स्टाफ की नौकरी पर संकट, सरकार ने मांगी लिस्ट

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद नॉन ऑफिशियल स्टाफ की नौकरियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हाल ही में जारी किए गए एक नोटिस में सभी सरकारी विभागों से नॉन ऑफिशियल स्टाफ की लिस्ट मांगी गई है। यह नोटिस मुख्य सचिव द्वारा जारी किया गया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इन कर्मचारियों की सेवाएं जल्द ही समाप्त की जा सकती हैं।

जानें कौन होते हैं नॉन ऑफिशियल स्टाफ?

नॉन ऑफिशियल स्टाफ यानी गैर-आधिकारिक कर्मचारी वे होते हैं, जो किसी सरकारी विभाग या एजेंसी के लिए काम तो करते हैं लेकिन वे नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं होते। इन्हें किसी विशेष परियोजना, सलाहकार भूमिका या विशेषज्ञता के आधार पर नियुक्त किया जाता है। हालांकि, इन्हें सिविल सेवा का हिस्सा नहीं माना जाता और इनका कार्यकाल आमतौर पर अस्थायी होता है। आसान शब्दों में कहें तो वे बाहरी विशेषज्ञ होते हैं, जिन्हें किसी सरकारी पद पर नहीं रखा जाता, लेकिन नीति-निर्माण या प्रशासनिक कार्यों में सहयोग के लिए नियुक्त किया जाता है।

AAP सरकार की नियुक्तियों की नई सरकार करेगी समीक्षा

APP सरकार के कार्यकाल के दौरान दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में नॉन ऑफिशियल स्टाफ की नियुक्तियां की गई थीं। इनकी नियुक्ति खासतौर पर नीति सलाहकार, मीडिया रणनीतिकार और अन्य प्रशासनिक कार्यों में सहायता के लिए की गई थी। लेकिन अब दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई BJP सरकार इन नियुक्तियों की समीक्षा कर रही है। मुख्य सचिव द्वारा जारी नोटिस में सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने विभागों में कार्यरत नॉन ऑफिशियल स्टाफ की सूची जल्द से जल्द प्रस्तुत करें। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इन कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जा सकता है।

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27 साल बाद हुई है BJP की ऐतिहासिक वापसी

दिल्ली में 27 साल बाद बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई है। इस बार के विधानसभा चुनाव में BJP और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन जनता का जनाधार बीजेपी के पक्ष में रहा। बता दें कि BJP दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की है।जबकि आम आदमी पार्टी इस बार सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई। चुनाव में आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया जैसे बड़े नेता भी अपनी सीट बचाने में असफल रहे। इसके बाद से ही दिल्ली सरकार में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

नौकरी जाने का खतरा, क्या होगा आगे?

सूत्रों के मुताबिक, BJP सरकार अब नॉन ऑफिशियल स्टाफ की नियुक्तियों की जांच करेगी और यदि अनियमितता पाई जाती है तो इनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन जिन कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं, वे निश्चित रूप से चिंतित हैं।